Thursday, December 8, 2022
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    योगी का ठाकुरवाद, के पी मौर्य का पार्टीवाद, किसने मारी किसके पैर पर कुल्हाड़ी ?

    आदित्यनाथ योगी ने अपनी ठाकुर जाति को अपना स्वाभिमान बताया तो आज केपी मौर्य ने कमल का फूल यानी अपनी पार्टी को अपना स्वाभिमान बताया। चल क्या रहा है दोनों के बीच!
    पिछली बार इनका मुख्यमंत्री का पत्ता कट गया था
    बहुत बुरा हुआ था इनके साथ। पोस्टरों में इनकी बड़ी बड़ी फ़ोटो लगाकर इनके नाम पे वोट ले लिए पर सीएम पैराशूट से लैंड करा दिया
    फिर भी इन्होंने पाँच साल इंतज़ार किया
    ये हैं के पी मौर्य . यूपी के दो में से एक उप मुख्यमंत्री

    खबरें फैलना शुरु हुईं के पी मौर्य नाराज़ हैं
    हों भी क्यों न , मलाई ले ली ओबीसी का चेहरा दिखाकर और खिला दी ठाकुरों के योगी को मुख्यमंत्री बनाकर

    इसलिए दो बनाने की भी कहानी ऐसी है कि एक ओबीसी, एक ब्राह्मण ताकि ठाकुर के सीएम बनाए जाने से नाराज़ इन दोनों जातियों को शांत किया जा सके।

    आदित्यनाथ जो खुद को योगी कहते हैं
    पर अजय बिष्ट होने से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं
    एक तर्क उन्हें सीएम बनाने का ये दिया गया कि वो तो योगी हैं, भगवाधारी हैं, किसी जाति के नहीं हैं , जाति ख़त्म करने के लिए हिंदुओं को एक करने के लिए सबसे अच्छा सिंबल हैं।
    शायद ये सुनकर नाराज़ वर्गों ने कुछ समय के लिए तसल्ली कर ली हो

    मुख्यमंत्री बनने से भी पहले गोरखपुर में योगी खुद कह चुके हैं योगी की कोई जाति नहीं होती

    लेकिन कल सामने आया हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रकार का पूछा वो सवाल जिसने साफ़ कर दिया ये योगी सिर्फ नाम के हैं, जाति अब भी कूट कूट के अंदर भरी है
    हालाँकि बीजेपी की आई टी सेल कूद पड़ी वो आरोप लगाकर जो वो खुद दूसरों के साथ करते हैं, यानी वीडियो एडिटेड है, पूरी बात तो ये है।
    तो पहले उस हिस्से की बात करते हैं जो वायरल हुआ-
    हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रकार ने सवाल पूछा था
    आपसे ये कहा जाता है कि आप ख़ाली राजपूतों की राजनीति करते हैं तो आपको दुख होता है?
    योगी आदित्यनाथ ने जवाब दिया- नहीं । कोई दुख नहीं होता है । क्षत्रिय जाति में पैदा होना कोई अपराध थोड़े ही है। इस देश की एक ऐसी जाति है जिसमें भगवान भी जन्म लिए हैं। और बार बार जन्म लिए हैं. जाति पर स्वाभिमान हर व्यक्ति को होना चाहिए।
    इस वीडियो पर आईटीसेल का कहना कि ये अधूरा है बेमानी है क्योंकि आगे उन्होंने सिर्फ़ ये समझाने की कोशिश की कि इसके बावजूद उन्होंने जो कार्य किए वो जाति ध्यान में रखकर नहीं किए। पहला हिस्से में उन्होंने अपनी जाति पर स्वाभिमान किया, उसे भगवान की जाति बताया, कहा कि उन्हें बिल्कुल दुख नहीं होता कि उनपर ठाकुरवाद का आरोप लगता है। हम वो हिस्सा भी आपको पूरा बताएंगे जो आगे कहा था लेकिन उससे पहले योगी के इस बयान का गहरा मतलब तो समझाएँ कि उनके विचार आपसे क्या करा रहे हैं!
    आदित्यनाथ खुद को योगी कहते हैं
    संन्यासी वो हैं ही। हम इतना जानते हैं कि संन्यासी और योगी की कोई जाति नहीं होती वो खुद इस बात को मुख्यमंत्री बनने से पहले कह भी चुके हैं। वैसे तो मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी जाति और धर्म दोनों ही नहीं होना चाहिए पर अब क्या ही कहें। उनके बयान से साफ़ है वो दिल से और विचारों से आज भी अजय बिष्ट ही बने हुए हैं, तो उनके इन विचारों को सुनने के बाद उन्हें अजय बिष्ट बोला जाए तो उन्हें बुरा नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा अपनी जाति पर सबको स्वाभिमान होना चाहिए और इस जाति में जन्म लेना कोई अपराध नहीं। लेकिन शायद अजय बिष्ट की डिक्शनरी में यादव बिरादरी में जन्मा या मुस्लिम धर्म में जन्मा, या दलितों के घर में जन्मा अपराधी ही होगा तभी तो वो अखिलेश पर यादववाद का, मायावती पर दलित की राजनीति का , आरोप लगाते हैं! उसी तरह उनका भी तो अपराध नहीं हुआ।

     

    आगे वो बयान में भगवानों को भी जातियों के आधार पर बाँटते नज़र आ रहे हैं। इससे ज़्यादा निचले स्तर की राजनीति नहीं हो सकती। ज़रा सोचिए अब तक हम भगवान को राजनीति में इस्तेमाल करके पहले ही स्तर गिरा चुके हैं, ऊपर से अब हम उन्हें भी जातियों में बाँट रहे हैं। जिन श्री राम ने शबरी की जाति देखी न उनके सबसे बड़े भक्त हनुमान की, जिनका अगला अवतार यदुवंशी यानी यादव बिरादरी में जन्म लिए था , उन सब भगवानों की जाति ढूँढने पर आपको मजबूर किया जा रहा है। बताइए कभी जय हनुमान ज्ञान गुन सागर पढ़ते हुए आपके मन में कभी आया कि हनुमान जी की जाति क्या थी? या श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत करते हुए सोचा कि वो यादवों के भगवान हैं! आपको ही नहीं . आपके स्वतंत्रता सेनानियों को ही नहीं आपके भगवानों को भी आपस में लड़ाया जा रहा है , बाँटा जा रहा है, किस जाति के देवता सर्वश्रेष्ठ ! आपको ये सोचने के लिए फँसाया जा रहा है। जो योगी होते हैं वो अपनी जाति पर नहीं अपनी तपस्या , त्याग, संघर्ष, शान्तिप्रिय स्वभाव पर स्वाभिमान करते हैं
    हम श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम और कृष्ण को गीता ज्ञान से जानते हैं और जानना चाहते हैं न कि उनकी जाति से।

    ठाकुर बनाम यादव करके राम बनाम कृष्ण करके आपसे क्या ख़तरनाक खेल खिलाया जा रहा है आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते

    वहीं एक पोस्टर ये भी सामने आ रहा है
    जिसमें –
    क्या इससे हिंदुओं की भावना आहत नहीं होती! अब ये खुद को ही भगवान बताने लग गए हैं!
    वोट के लिए इतना गिरेंगे ये लोग?
    लोगों ने पूछ ही डाला यही अजय बिष्ट 2018 में अलवर में हनुमान की जाति दलित बता आए तो ये हनुमान कैसे हो गए ।
    सवाल वाजिब है लेकिन ये सवाल करने की नौबत आ चुकी है वो शर्मनाक है।

    अब वीडियो को आगे बढ़ा दिया जाए। आगे कहीं हुई बात भी बता देते हैं, आगे वो कहते हुए पाए जाते हैं- लेकिन हाँ मैंने प्रदेश के अंदर बिना भेद भाव के बिना चेहरा देखकर के हर मत और मज़हब के लोगों के हितों के लिए हमारी सरकार ने काम किया है। मैं ये मानता हूँ जाति की बात वो लोग करते हैं जो लोग जब अवसर मिलता है अपने परिवार के हितों के लिए कार्य करते हैं। वो लोग अपनी जाति के लिए भी कार्य नहीं किए, हमने अगर 43 लाख ग़रीबों के आवास बनाए तो क्षेत्रीय इनमें 1% भी नहीं होंगे। 1000 भी नहीं होंगे , ये 43 लाख आवास किसी दलित और किसी पिछड़े के ही बने हैं। किसी अल्पसंख्यक के ही बने हैं।
    2 करोड़ 61 लाख शौचालय जो बने हैं ये किसी गरीब , पिछड़े दलित अति पिछड़ों के लिए ही बने हैं। 15 करोड़ लोगों को खाद्यान्न मिल रहा है प्रदेश के नाम से ही जा रहा है। इसलिए सबका साथ सबका विकास के भाव से कार्य किया गया है।

    ठीक है मान लिया जाए । आदित्यनाथ की पूरी बात सुन ली और मान ली जाए तो हमारा सवाल सिर्फ़ इतना है, फिर क्यों इन पर जातिवाद का आरोप लगता रहा? अगर ये महज़ आरोप है फिर तो अखिलेश भी कह सकते हैं उनके लाभ भी सबको मिले।उनपर भी बेमानी आरोप लगाए गए। उन्होंने आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे बनाया तो ऐसा तो है नहीं सिर्फ यादव ही उससे होकर गुज़रे! मायावती ने नोएडा एक्सप्रेस वे बनाया तो ऐसा तो है नहीं सिर्फ दलित ही उसका इस्तेमाल कर सके! योगी और अखिलेश दोनों जानते हैं काग़ज़ों पर लिखित रूप से किसी एक जाति को या धर्म को लाभ नहीं दिए जा सकते । ये लाभ ग़ैर काग़ज़ी होते हैं, जिसे पक्षपात कहते हैं जो पोस्टिंग में हो, मदद में हो, सिफ़ारिश में हो, समय देकर बात सुनने की हो, बल देने की हो, आत्मविश्वास देने की हो, ख़ास जाति वाले की गलती करने पर भी छोड़ देने की हो, सुनवाई की हो वग़ैरह वग़ैरह , जिसे आप सिस्टम में हेराफेरी के नाम से भी जानते हैं।

    पिछले साल सितंबर में जितिन प्रसाद को कांग्रेस ब्राह्मण चेहरे के रूप में लेकर आया गया और योगी कैबिनेट में वो छठे ब्राह्मण मंत्री थे, और ब्राह्मण बिरादरी के ग्यारहवें नाम जिन्हें काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर में जगह दी गई। मंत्रालय में सात नए ओबीसी और दलित चेहरों को जगह दी गई और विस्तार कर मंत्रियों की संख्या और भी बढ़ाकर 60 कर दी गई। लेकिन सवर्ण यानी उच्च जाति के मंत्रियों की संख्या इसमें भी ज़्यादा ही रही।
    11 ब्राह्मण – नाराज़ जो चल रहे थे
    7 ठाकुर थे

    60 में से 27 अपर कास्ट हैं
    ओबीसी 23
    दलित – 9
    एक शिया मुस्लिम

    कैबिनेट मंत्री बनाए गए 24 जिनमें से 16 उच्च जातियों के थे
    5 ब्राह्मण और 5 राजपूत
    7 ओबीसी (स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान पहले ही इस्तीफ़ा दे चुके हैं)

     

    जब नई नई योगी की सरकार बनी थी 2017 में तब ये खबर हिंदुस्तान टाइम्स ने ही छापी थी
    कैसे योगी सरकार के 100 दिन के अंदर ही इस सरकार में उच्च जातियों की वापसी इनके लिए चुनौती बन गई है

    खबर की शुरुआत में है अलीगढ़ के वाक्या का ज़िक्र किया है , इसे सुनकर ही आप समझ जाएँगे ठाकुरों का दबदबा किसी काग़ज़ में भले उस तरह न दिखे लेकिन ज़मीन पर इस तरह दिखेगा

    मई 2017 में अलीगढ़ के एक गाँव के रहने वाले चंद्र पाल नाम के एक दलित ने सुरेश सिंह नाम के एक ठाकुर द्वारा घर के पास नाली बनाए जाने का विरोध इस बात पर किया था कि वो ज़मीन सभी के लिए थी। ठाकुरों ने दलितों के घर पर पत्थरबाज़ी की। दोनों जातियों में टकराव की स्थिति बन गई। 10 लोग घायल हुए जिनमें से ७ दलित थे। कई दलितों ने डरकर गाँव छोड़ दिया ।
    दबदबा किसका था ये अजय बिष्ट से कौन पूछेगा! कैराना में पलायन का राग अलापने वाले अपनी बिरादरी के खड़े किए डर पर जवाब कैसे देंगे!

    हाथरस की दलित बेटी और उसके परिवार को सच बोलने से रोकने के लिए क्या क्या किया गया वो आप सबके सामने है। आरोपी ब्राह्मण थे यानी उच्च जाति। इलाहाबाद हाईकोर्ट तक से योगी और उनकी सरकार को ख़ूब फटकार पड़ी। महीनों तक छावनी में बदल दिया गया उनका घर, रातों रात बिना परिवार की मर्ज़ी के बच्ची का शव जला दिया , कवर करने जा रहे केरल का एक पत्रकार सिद्दीक़ी कप्पन आज तक मुसलमान होने की सज़ा काट रहा है, उस पर UAPA लगा दिया गया।

    इस खबर में ही आगे बताया गया है कि यूपी के एक डीएम ने उस वक्त बताया था ये सब बातें कहीं नहीं जाती हैं, खुद समझने के लिए होती हैं। हमें ये खुद ब खुद पता है कि ठाकुरों के साथ बर्ताव अच्छा करना है।सहारनपुर में भी यही देखने को मिला था जब ठाकुरों और दलितों के बीच विवाद खड़ा हुआ था। शब्बीरपुर की दलित बस्ती जहां हिंसा सबसे ज़्यादा हुई थी वहाँ सरकार ठाकुरों का साथ देती नज़र भी आई थी।

    एक उच्च अधिकारी ने ये बताने के लिए कि सिर्फ ठाकुर क्यों दिखते हैं बाक़ी भी देखो
    ये खुद ही साफ़ बता दिया कि 75 ज़िलाधिकारियों में 42 उच्च जाति के थे , 18 में से 11 रेंज चीफ़ अपर कास्ट थे , 8 में से 5 ज़ोनल हेड अपर कास्ट थे। ये आँकड़े 2017 में जब योगी सरकार बनी तभी के हैं।

     

    दूसरे तो दूर आपके अपने ग़ैर ठाकुर विधायक मंत्री आपपर ठाकुरवाद का आरोप लगाकर आपका साथ उस वक्त छोड़ गए जब आपको सबसे ज़्यादा उनकी ज़रूरत थी। शायद यही समय उन्हें भी सही लगा, इससे पहले करते तो अभी तो पुराने केस पर सिर्फ अरेस्ट वॉरंट ही आया था , और भी न जाने क्या क्या आता!
    कल योगी ने अपने ठाकुरवाद पर स्वाभिमान दिखाया तो पार्टी में बचे एक मात्र ओबीसी चेहरा के पी मौर्य ने आज ट्वीट करके कमल को अपना स्वाभिमान बताया । ये हाई कमांड को मेसेज देने की कोशिश थी कि बाबा तो ठाकुर पहले हैं मैं कमल पहले हूँ। उनके लिए संन्यासी होकर भी अपनी जाति पहले है मेरे लिए ओबीसी चेहरा होकर भी अपनी पार्टी पहले है।
    इस तरह अखिलेश यादव पर यादववाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाने वाले खुद ही ठाकुरवाद को बढ़ावा देने वाली कुल्हाड़ी पर पैर रखते चले गए

    इस बात में कोई दो राहें नहीं कि अखिलेश यादव पर यादव और मुसलमानों का पैरोकार बनने का आरोप लगता रहा। आरोप लगे तो कुछ सच्चाई भी थी, जनता भी इसे मानती थी और खुद अखिलेश यादव भी मान ही रहे होंगे इसीलिए तो अखिलेश ने इसबार अपनी उस छवि से निकलकर खुद को सबका नेता बनाने की कोशिश की। ग़ैर यादव ओबीसी, दलित, मुसलमान, सबको साथ लेकर चलने की छवि बनाना चाह रहे हैं अखिलेश यानी अखिलेश अगर जीते तो उनकी राजनीति अलग होगी, वो नहीं जिसे आपने पिछली बार देखा था और उसी ने उन्हें हराने का काम भी किया था।
    वहीं योगी इस बार अपने पहले कार्यकाल के अंत में उसी संकट से जूझ रहे हैं जिससे अखिलेश जूझ रहे थे। जातिवाद का आरोप।
    इससे ध्यान भटकाने के लिए योगी लगातार 80:20 , जिन्ना जिन्ना , हिंदू मुसलमान कर रहे हैं ताकि उनके ठाकुरवाद के आरोपों पर पर्दा डाला जा सके और हिंदू मुस्लिम के नाम पर वोट पड़ने लगे। यहाँ तक कि जब से हिंदुस्तान टाइम्स के इंटरव्यू में अपनी जाति पर स्वाभिमान जताने वाला बयान आ गया उसके बाद से योगी की बौखलाहट ट्विटर पर साफ़ देखने को मिली
    तीन मिनट में तीन ऐसे ट्वीट किए जिससे ठाकुरवाद पीछे हो जाए और हिंदू मुस्लिम का पुराना सफल दांव आगे हो जाए

    ये दांव इस बार कितना सफल होगा वो तो जनता ही बताएगी उसे धर्म और नफ़रत चाहिए
    या पेट में रोटी, काम की आज़ादी, अस्पताल में इलाज और शिक्षित बच्चा।

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