Saturday, May 21, 2022
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    आखिर क्या है उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा?

    उत्तर प्रदेश का चुनावी भ्रमण करते करते हमने कई अलग जिलों के लोगों से बात की। कुछ से चुनाव के बारे में तो कुछ से उनकी समस्याओं के बारे में अलग जगह के अलग मुद्दे थे, अलग परेशानी थी। लेकिन गौर करने वाली बात तो ये है कि हमें जगह जगह पर कुछ सामान्य मुद्दे भी मिले, कुछ ऐसी परेशानियां जो कबसे चली आ रहीं है, जिनका अब तक कोई समाधान नहीं निकला ह। जिले एक दूसरे से काफी लम्बी दूरी पर हैं लेकिन वो सामान्य समस्याओं से जुड़े हुए है।

    हम सबसे पहले पहुंचे फ़िरोज़ाबाद, जहाँ के गांवों में हमने कुछ लोगों से बात की। वहां के लोगों ने अपनी अनेक समस्यायें गिना दीं, सबसे पहला मुद्दा जिससे गांव में लगभग हर आदमी ग्रस्त था वो है आवारा पशु का मुद्दा। इसी गांव में नहीं बल्कि ये हमें कई जगह सुनने को मिला।

    आवारा गाय आकर किसानों के खेत के खेत चट्ट कर जातीं हैं, और इनकी मुश्किलें तो तब बढ़तीं हैं जब पशु अकेला नहीं बल्कि पूरे झुंड में आ जाते हैं, और किसानों को उन्हें भगाना मुश्किल हो जाता है, झुण्ड को भगाने में किसानों पर जान का खतरा बना रहता है, कभी कभी ये पशु किसानों पर हमला भी कर देते हैं।

    एक किसान बोला,”सरकार 5000 का राशन देती है, लेकिन 15,000 की फसल तो गैया चर जाती है मैडम, इसमें तो सिर्फ हमारा नुकसान हो रहा है, और तो और ये अधिकारी हमसे २०० रूपए मांगते हैं। इन्हें गौशाला में रखवाने के, चलो हम वो दे भी देते हैं तो ये कुछ दिन रखकर फिर इन्हें बाहर छोड़ देते हैं।”
    किसानों की अवस्था आवारा पशु को लेकर दयनीय है। उन्हें पूरा दिन खेत में मेहनत करने के बाद भी आराम नसीब नहीं होता, काम खत्म करने के बाद उन्हें अपने खेतों की रखवाली करनी पड़ती है, सिर्फ खाने के लिए वो अपना घर देख पाते हैं। किसान इस देश की रीढ़ की हड्डी हैं । सरकार को किसानों की राहत के लिए जल्द से जल्द कदम उठाना चाहिए।

    दूसरी समस्या जो कई गांव में सुनने को मिली वो है किरकिरा नमक। जब गाँव वालों से उनकी समस्या पूछी तो बोल पड़े, राशन तो सरकार दे रही है, लेकिन क्या वो राशन इस्तेमाल करने लायक है? एक आदमी ने बतौर हमारे सामने पानी में नमक घोलकर दिखाया, और वो पूरी तरह नहीं घुला, इन गांव वालों को अपने पैसे से नमक खरीदकर खाना पड़ रहा है। बाजार से खरीदे नमक और सरकार द्वारा दिए गए नमक में तो हमने भी फर्क महसूस किया।हमारी बातें सुन महिला हमें बाजार से खरीदा नमक दिखाने लगी, उसने कहा कि “पूरी सब्ज़ी बन जाती है लेकिन ये नमक नहीं घुलता, आप चाहें तो मैं आपको दिखा देती हूँ।”

    नमक ही तो खाने में स्वाद देता है, बिना नमक खाना तो जैसे बिना पानी की नदी। सरकार नमक तो दे रही है, लेकिन एक बार गुणवत्ता की जांच भी होनी चाहिए, तभी तो गांव वाले भी स्वादिष्ट खाने का लुत्फ उठा पाएंगे।

    तीसरी समस्या जिसकी शिकायत ज्यादातर गांव की महिलाओं से आयी वो है बच्चों की शिक्षा का नुकसान। २ साल से गाँव के बच्चे स्कूल नहीं गए हैं। कौशांबी की सिराथू विधानसभा के गाँव में एक महिला ने ऐसी बात कही जिसे नकारा नहीं जा सकता, वो बोली “दीदी हम तो खाने के लिए, खाद के लिए तक पैसे जोड़ते हैं, फ़ोन और इंटरनेट कहाँ से लाएं ?ऑनलाइन कैसे पढ़ाएंगे हम अपने बच्चों को?”

    जहाँ पूरे यूपी में सरकार ने मध्य फरवरी से ही बच्चों के स्कूल खोल दिए, हमारी जानकारी में ये भी आया कि वहाँ सिर्फ चुनाव की वजह से महज़ दो दिन पहले विद्यालय खोले गाए। कोविड महामारी के दौरान लॉकडाउन तो लगा दिया था, और जिनकी मोबाइल खरीदने की हैसियत थी वो तो पढ़ लिए, लेकिन उन मासूमों का क्या जो इंटरनेट तो दूर मोबाइल तक नहीं खरीद सकते। क्या सिर्फ इस वजह से वो शिक्षा के हक़दार नहीं हैं ?
    २ साल एक विद्यार्थी की जिंदगी में बहुत महत्व रखते हैं, बच्चे एक साल का गैप तक लेने में परहेज करते हैं, यहाँ तो बिना मर्ज़ी के ही ये दो साल पिछड़ गए हैं।

    गांव वालों ने जितनी भी बातें कहीं सारी वाजिब हैं। वो हमें किसी भी तरह से चुनावी लक्ष्य से जुड़ी हुई नहीं लगी बल्कि उन्हें देख तो ऐसा लगा जैसे वो बस इंतज़ार ही कर रहे थे की कोई आए उनकी समस्याओं को सुने और सरकार तक पहुंचाए।

    चुनाव के अलावा भी ये बहुत बड़े मुद्दे हैं और चाहे जिसकी भी सरकार बने, सरकार को इन गाँव में जाकर एक बार निरक्षण करना चाहिए। इन गाँवों में अब तक कोई नहीं गया है , ये गांव भी हमारे देश का हिस्सा हैं, ये भी सारी सुविधाओं के उतने ही हकदार हैं जितने शहर के लोग। इनका मत भी उतना ही ज़रूरी है जितना शहर वासियों का। आने वाली सरकार को इन मुद्दों पर फ़ौरन कदम उठाना चाहिए, और इनकी दिक्कतों का हल निकालना चाहिए।

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    Ananya Gupta
    An enthusiastic take at life type of Individual, love talking to people and learning from them, Journalist, Citizen of the county first above everything.

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