Tuesday, July 5, 2022
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    क्या है TekFog App जिससे महिला पत्रकारों को गाली दिलाई जाती रही!

    डिजीटल मीडिया के दौर में प्राइवेसी एक मिथ्या है। लेकिन फिर भी हर कोई चाहता है कि उसकी प्राइवेसी का हनन न हो। और सरकार से उम्मीद करता है कि सरकार उसकी निजता की रक्षा करेगी। लेकिन अगर सरकार ही उस डेटा का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करे, चुनाव जीतने के लिए करे तो आम आदमी और किससे उम्मीद करें! हाल ही में द वायर ने कई अहम खुलासे किए हैं, जो दावा करते हैं कि कैसे भाजपा सरकार आम नागरिकों के डेटा का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए करती है।

    तो चलिए आज समझने की कोशिश करते हैं कि द वायर की रिपोर्ट में आखिर क्या है और क्यों इतना बवाल मचा हुआ है-
    पिछले कई दिनों से टेकफॉग (TekFog) ऐप की काफी चर्चा हो रही है। जिसे कथित तौर पर भाजपा की बनाई हुई एक गोपनीय ऐप बताया जा रहा है, जो नफरती ऐजेंडा सेट करने, ट्विटर ट्रेंड्स के साथ छेड़छाड़ करने और महिलाओं के साथ बदसलूकी करके उन्हें सोशल मीडिया पर खामोश करने के लिए इस्तेमाल किया जाने का दावा कर रहें है।

    तो क्या है टेकफॉग ऐप?

    द वायर की स्वतंत्र पड़ताल के मुताबिक टेकफॉग (TekFog) एक ऐसा ऐप है जो सायबर दुनिया में नफरत फैलाने, सोशल मीडिया ट्रेंड्स में छेड़छाड़, एजेंडा सेट करने में और लोगों को ट्रोल करने में इस्तेमाल होती आ रही है। यह ऐप कृत्रिम रूप से सत्ताधीशों और पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए काम करता है। इस ऐप का इस्तेमाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों का ध्यान एक मुद्दे से भटकाकर किसी और मुद्दे की तरफ करने में किया जाता है।

    द वायर की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि टेकफॉग ऐप का इस्तेमाल वाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल साइट्स हैकिंग करने के लिए किया जाता है। द वायर ने अपनी रिपोर्ट में एक ट्वीट का जिक्र किया है जिसके आधार पर उन्होनें यह जांच शुरू की।

    क्या था वो ट्वीट

    अप्रैल 2020 में ट्वीटर यूजर @Aarthisharma08 ने एक ट्वीट कर दावा किया था कि टेकफॉग ऐप रीकैप्चा कोड (ReCaptcha) को बाईपास कर सकता है और हैशटैग ट्रैंड्स हाइजैक कर अपने हिसाब से ऑटो-अपलोड भी कर सकते हैं।

    Archive Tweet 01, Tweet 02

     

    यूजर ने देवांग दवे जो कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय सोशल मीडिया और आईटी प्रमुख और महाराष्ट्र में पार्टी के वर्तमान चुनाव प्रबंधक हैं पर आरोप लगाया कि 2018 में दवे ने वादा किया था कि भाजपा के 2019 लोकसभा चुनाव जीतते ही उसे सरकारी नौकरी दी जाएगी।

     

    द वायर ने अपनी रिपोर्ट में 4 तरीके बताए हैं जिसके जरिए टेकफॉग ऐप काम करती है

    नेरेटिव सेट करना – द वायर के मुताबिक इस ऐप का मुख्य काम नेरेटिव सेट करना है। ट्विटर ट्रेंडिंग और फेसबुक ट्रेंड वाले सेक्शन को यह ऐप बड़ी आसानी से हाईजैक कर सकती है। ऐप के इन-बिल्ट ऑटोमेशन फीचर्स का इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति या ग्रुप के अकाउंट्स से ट्वीट को रीट्वीट या ऑटो शेयर कर सकते हैं।यह ऐप साथ चल रहे हैशटेगों को स्पैम भी कर सकती है।


    उदाहरण – द वायर के मुताबिक #CongressAgainstLabourers हैशटैग 4 मई 2020 को रात 8:25 बजे शेयर किया गया था। उस दिन कम से कम 55,000 ट्वीट्स में इस हैशटैग को यूज करके ट्रेंडिंग सेक्शन में पहुंचाना था। टेकफॉग ऐप के जरिए मात्र 2 घंटे में हैशटैग ट्विटर ट्रेंडिंग में था। और आधे घंटे में ट्विटर पर 57,000 बार रीट्वीट किया जा चुका था।

    निष्क्रिय वाट्सऐप अकाउंट्स की हाइजैकिंग

    द वायर ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह ऐप किसी भी बंद पड़े वाट्सऐप अकाउंट्स को हाईजैक कर सकता है।उसके बाद उन अकाउंट्स के सभी नंबरों या फिर सर्वाधिक बार कॉल किए गए नंबर पर मैसेज भेज सकता है।और इसके साथ ही उनके निजी डेटाबेस को भी चुरा कर अपने हिसाब से उस डेटा का इस्तेमाल करता है।

    ट्रोलिंग के लिए डेटाबेस का इस्तेमाल


    द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक क्लाउड डेटाबेस के जरिए टेकफॉग ऐप को आम लोगों के पेशे, धर्म, भाषा, उम्र, लिंग, राजनीतिक झुकाव और शारीरिक विशेषताएं पता कर सकती है। इन डेटाबेस का इस्तेमाल कर यह ऐप गूगल शीट से जोड़कर या ऑटो जेनेरेटिंग की-वर्डस के जरिए ऑटो-रिप्लाई कर सकता है।

    जिसमें ज्यादातर गाली-गलौज, अश्लील और अपमानजनक शब्द होते हैं। द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक इस ऐप का इस्तेमाल महिला पत्रकारों को गाली देने के लिए भी किया गया है। द वायर के मुताबिक 1 जनवरी 2021 से 31 मई 2021 तक लिए गए डेटा के आधार पर टेकफॉग के जरिए महिला पत्रकारों पर अश्लील टिप्पणियां की गई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकार राणा अय्यूब को सबसे ज्यादा 22,505 बार अश्लील गालियां दी गई। उसके बाद बरखा दत्त, निधि राज़दान, रोहिणी सिंह, स्वाति चतुर्वेदी, सागरिका घोष, मनीषा पांडे, फे डिसूजा, आरफा खानम शेरवानी और स्मिता प्रकाश भी शामिल हैं।

    Courtesy: The Wire/ Datawrapper

    द वायर के मुताबिक टेकफॉग ऐप के निशाने पर और भी महिला पत्रकार शामिल हैं। जिसमें इस्मत आरा, हीबा बेग, नेहा दिक्षीत, फातिमा खान, ज्योति यादव, साक्षी जोशी, शिरीन भान और मधि त्रेहान भी शामिल हैं। 5 महीनें में इन महिला पत्रकारों पर 4.6 मिलियन बार इनके ट्वीट पर गालियां रिप्लाई किए गए। जिसमें से 8 लाख रिप्लाई टेकफॉग ऐप के जरिए किए गए हैं।

    पल भर में सबूत मिटाने की ताकत-
    टेकफॉग ऐप पलभर में अपनी सारी हिस्ट्री को डिलीट कर सकता है।

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    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

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