Sunday, October 2, 2022
More

    क्या है आईएएस कैडर नियम 1954 कि सीएम ममता के बाद अब गहलोत और बघेल को भी लिखना पड़ा पीएम को पत्र!

    केंद्र सरकार आईएएस कैडर नियम 1954 में कुछ संशोधन करने जा रही है। जिसके बाद से कई राज्यों की सरकारों ने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।केंद्र सरकार ने राज्यों को जवाब देने की समय सीमा 5 जनवरी से बढ़ाकर 25 जनवरी कर दी है। बता दें कि 31 जनवरी से संसद सत्र शुरू होने वाला है,और इस मुद्दे पर संसद में हंगामे के आसार भी दिख रहे हैं।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों की सरकारों ने भी इस प्रस्तावित संशोधन पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। अब तक बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उड़ीसा मेघालय, बिहार, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश ने आईएएस कैडर नियम (1954) के प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति जताई है। बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने इंडियन एक्सप्रेस को कहा कि मौजूदा व्यवस्था ही ठीक है।

    क्या है आईएएस कैडर नियम 1954

    आईएएस कैडर नियम 1954 के मुताबिक यूपीएससी पास अधिकारियों की भर्ती केंद्र करता है, लेकिन जब उन्हें उनके राज्य कैडर अलॉट किए जाते हैं तो वह राज्य सरकार के अधीन आ जाते हैं। नियम के अनुसार एक अधिकारी को संबंधित राज्य सरकार और केंद्र सरकार सहमति से ही केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के अधीन सेवा के लिए प्रतिनियुक्त किया जा सकता है।किसी भी असहमति की स्थिति में केंद्र सरकार फैसला लेती है और राज्य सरकार उस फैसले को लागू करती है।

    केंद्र को अधिक अधिकार देने वाले प्रतिनियुक्ति को मई 1969 में जोड़ा गया था। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 1 जनवरी 2021 तक 5200 आईएएस अधिकारियों में से मात्र 458 ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पद पर आसीन हैं।

    क्या है प्रस्तावित संशोधन आईएएस कैडर 1954 नियम

    आईएएस कैडर नियम 1954 के प्रस्तावित संशोधन के जरिए विभिन्न राज्यों के आईएएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के नियमों को बदलने की कोशिश की जा रही है। कार्मिक मंत्रालय ने 20 दिसंबर 2021 को राज्यों को पत्र भेजे थे।आईएएस कैडर नियम 1954 6(1) में दो संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था। इसके मुताबिक प्रत्येक राज्य सरकार केंद्र सरकार को प्रतिनियुक्ति के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व की सीमा तक विभिन्न स्तरों के पात्र अधिकारी उपलब्ध कराएगी।

    इस पत्र में आगे कहा गया – “वास्तविक संख्या केंद्र सरकार को प्रतिनियुक्ति किए जाने वाले अधिकारी संबंधित राज्य सरकार के परामर्श से केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाएंगे।”
    मतलब केंद्र सरकार बिना राज्य सरकार की मंजूरी से किसी भी अधिकारी को केंद्र में बुला सकती है।राज्यों के पास उनके अधिकारियों को रोकने का कोई हक नहीं होगा।

    दूसरे संशोधन 4(1) में प्रस्तावित है कि असहमति के मामले में राज्य सरकार केंद्र के निर्णय को निर्धारित समय के भीतर लागू करेगी।जहां भी संबंधित राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्णय को निर्धारित समय के भीतर लागू नहीं करती है तो उस अधिकारियों को केंद्र सरकार द्वारा तय तिथि से ही मुक्त कर दिया जाएगा। यानी कि अगर कोई सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को केंद्र नहीं भेजती है तो केंद्र के पास उन अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने का पूरा हक होगा।केंद्र ऐसे अधिकारियों को पद से मुक्त कर सकती है। जिसके बाद उन अधिकारियों को पेंशन तक नहीं मिल पाएगा।

    बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मात्र 8 दिन में दो बार प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति जताते हुए तुरंत वापस करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा- “आईएएस कैडर नियमों के बदलाव अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए राज्यों को बाध्य करेगा। इससे राज्यों में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी। यह प्रस्तावित संशोधन सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है और केंद्र और राज्यों के बीच लंबे समय से बने सामंजस्यपूर्ण समझौते को बिगाड़ देगी।”

    इसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति दर्ज करायी है। उन्होंने कहा – “यह प्रस्तावित संशोधन में केंद्र सरकार बिना राज्य सरकार या संबंधित अधिकारी से पूछे बिना आईएएस अधिकारियों को केंद्र में बुला सकता है।ऐसा करना संविधान और संघीय भावना के खिलाफ है।”

    वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि आईएएस कैडर 1954 के नियम 6(1 ) में प्रस्तावित संशोधन को रोका जाना चाहिए। सीएम गहलोत ने आगे कहा- “यह प्रस्तावित संशोधन हमारे संविधान की सहकारी संघवाद की भावना को प्रभावित करेगी।इससे केंद्र एवं राज्य सरकारों के लिए निर्धारित संवैधानिक क्षेत्राधिकार का उल्लंघन होगा और राज्य में पदस्थापित आईएएस के अधिकारियों में निर्भय होकर एवं निष्ठापूर्वक कार्य करने की भावना में कमी आएगी।”

    आपको याद होगा कि कैसे बंगाल चुनाव के दौरान बंगाल मुख्य सचिव 1987 बैच के आईएएस अधिकारी अलपन बंदोपाध्याय को लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच में तनातनी की स्थिति हो गई थी।केन्द्र ने मुख्य सचिव को उनके रिटायरमेंट के दिन ही तलब किया था।लेकिन ममता बनर्जी ने मुख्य सचिव को रोक लिया और उन्हें अपना मुख्य सलाहकार बना लिया।

    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पर बंगाल इलेक्शन के दौरान हमले के बाद केंद्र सरकार ने तीन आईपीएस अधिकारियों को दिल्ली बुलाया था।लेकिन तब भी सीएम ममता बनर्जी ने उन अधिकारियों को दिल्ली जाने से रोक दिया।जिसके बाद से केंद्र ने भी ज्यादा दबाव नहीं बनाया।

    Advertisement
    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

    संबंधित खबरें

    Conntect with Us

    898,779FansLike
    5,434FollowersFollow
    605,819SubscribersSubscribe
    - Advertisement -