Friday, July 1, 2022
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    बुल्ली-सुल्ली की गिरफ्तारियोंं में मोदी को क्यों याद दिलाने की ज़रूरत है- “इन्हें इनके कपड़ों से पहचाना जा सकता है”

    याद कीजिए प्रधानमंत्री का वह भाषण जिसमें उन्होंने कहा था, “यह आग लगाने वाले कौन है, उनके कपड़ों से पता चल जाता है”

    तो पीएम मोदी कौन हैं यह आग लगाने वाले लोग और क्या है इनका मजहब? आप इन युवाओं को उनके कपड़ों से पहचान तो रहे हैं ना! देखिए कैसे इतनी कम उम्र में इनलोगों ने अपने परिवार की जिंदगी में आग लगा दी।
    देखिए कैसे आपके कुशल नेतृत्व में हिंदू “खतरे से बाहर आ रहे हैं”।

    18 वर्ष की श्वेता सिंह अनाथ है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। लेकिन कुछ पैसों के लिए उसने दूसरी महिलाओं को टारगेट करना शुरू कर दिया है। इसके मन में मुस्लिमों के प्रति इतनी नफरत भरने वाला कौन है। एक महिला होने के बावजूद इसने दूसरी महिलाओं को ऑनलाइन बेचने का घिनौना काम किया। इसके कपड़े देख कर आखिर किसने इसे मुस्लिमों के प्रति नफरत करना सिखाया। 5 जनवरी को मुंबई पुलिस ने श्वेता सिंह को उत्तराखंड के रुद्रपुर टाउन से गिरफ्तार किया। 4 जनवरी को 21 वर्षीय विशाल झा को मुंबई पुलिस ने बेंगलुरु से गिरफ्तार किया तो वहीं बुल्ली डील्स का मुख्य आरोपी नीरज बिश्रोई को दिल्ली पुलिस ने 6 जनवरी को असम से गिरफ्तार किया।

    आज दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सुल्ली डील्स के मुख्य आरोपी 26 वर्षीय ओमकारेश्वर ठाकुर को इंदौर से गिरफ्तार किया।

    इन सब पर आरोप है कि इन लोगों ने गिटहब प्लेटफार्म पर एप बनाया और मुस्लिम महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी की। ये ऐसी मुस्लिम महिलाएं हैं जो मुखर होकर अपनी बात बड़ी प्रमुखता से रखती हैं। 1 जनवरी 2022 को जब द वायर की पत्रकार इस्मत आरा ने ट्वीट कर अपनी नीलामी की बात कही तो हर जगह चर्चा शुरू हो गई। F.I.R दर्ज होने के ठीक 2 दिन बाद से ही मुंबई पुलिस ने विशाल झा, श्वेता सिंह और मयंक रावत को गिरफ्तार किया। मुंबई पुलिस की फटाफट कार्रवाई को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी अपना हाथ पैर मारना शुरू कर दिए।

    दिल्ली पुलिस ने सुल्ली डील्स ऐप के मास्टरमाइंड ओमकारेश्वर ठाकुर और बुल्ली बाई एप के मास्टरमाइंड नीरज विश्नोई को गिरफ्तार किया।

    नीरज बिश्नोई के पिता का कहना है कि “उनका बेटा बस एक ही न्यूज़ चैनल देखता रहता था और शायद इससे उस पर बुरा असर पड़ा”। यह सभी आरोपी मुस्लिम दलितों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को ऑनलाइन निशाना बनाते थे। उन्हें ट्रोल करते थे। खालसा पद के नामों का इस्तेमाल कर मुस्लिम और सिखों के बीच बंटवारा करना चाहते थे। इन लोगों ने कम उम्र में ही नफरत की सारी हदें पार कर दी। पिछले कुछ सालों में न्यूज चैनल ने इनके मन में नफरत की बीज बो दिया।

    तो मोदी जी, इन्हें पहचानने में आपको दिक्कत तो नहीं हो रही है ना। उम्मीद करती हूं कि आप इन्हें इनके कपड़ों से पहचान पा रहे हैं।

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    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

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