Tuesday, July 5, 2022
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    क्या मोदी सरकार अब यूपी और पंजाब चुनाव से पहले सिखों को लुभाने की कोशिश कर रही है?


    पिछले कुछ दिनों से इनके फ़ैसले भी इसी दिशा में नज़र आ रहे हैं। सिखों को लुभाने के लिए उत्तराखंड के गवर्नर भी सिख Ex Army Officer Lt General गुरमीत सिंह बनाए गए थे।

    कृषि क़ानून भी गुरु पर्व पर ही वापस लिए थे।
    जब किसान आंदोलन चल रहा था आपको याद होगा कि नरेंद्र मोदी तब गुरुद्वारे में दर्शन के लिए भी गए थे। वो साबित करने में लगे थे कि वो सिखों के हितैषी हैं और उनका भला सोचते हैं। पर वहीं दूसरी तरफ़ उनके मंत्री और पार्टी के नेता सिख किसानों को खालिस्तानी और आतंकिवादी बुला रहे थे। मोदी खुद संसद में आंदोलित किसानों को आंदोलनजीवी का नाम दे रहे थे।

    पिछ्ले हफ्ते अकाली दल के नेता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के प्रमुख मनजिंदर सिंह सिरसा को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। ये पंजाब चुनाव से पहले अकाली दल के लिए एक बड़ा झटका लगा है।

    इस विज्ञापन को ध्यान से पढ़िएगा। सिखों को लुभाने के लिए इस विज्ञापन में सिख विरोधी दंगों में क़ानूनी प्रक्रिया का श्रेय लेने की कोशिश के साथ साथ इस बात का भी ‘एहसान’ जता दिया अफ़ग़ानिस्तान से 528 अल्पसंख्यकों को रेसक्यू कराके भारत लेकर आए।

    Image courtesy: Vijaita Singh

    अब आप ही सोचिए क्या ये सरकार का काम नहीं है जो आपके हमारे टैक्स के पैसे पर चलती है, ऐसे ही दिनों के लिए तो हम अपनी सरकारों को टैक्स देते हैं , भारतवासियों को ऐसी विपदा में जान बचाकर वापस लाने का श्रेय सरकार खुद लेने लगेगी तो कोई ये बताए कि आख़िर सरकार होती किसलिए है?

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