Tuesday, July 5, 2022
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    राफेल मुद्दे पर विपक्ष हुई हमलावर,पूछा- इंडोनेशिया ने भारत से कम दाम में ज्यादा जेट विमान कैसे खरीदे?

    राफेल विमान एक बार फिर विवादों में है।फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इंडोनेशिया ने फ्रांस से 42 राफेल व‍िमान खरीदने का सौदा क‍िया है। यह डील 8.1 अरब डॉलर की है।वहीं भारत ने 2016 में फ्रांस से 36 राफेल व‍िमानों का सौदा क‍िया था। भारत ने 36 व‍िमानों के ल‍िए ही 8.7 अरब डॉलर में डील की थी। विपक्ष एकबार फिर सरकार पर हमलावर है। विपक्ष का कहना है कि इंडोनेशिया ने भारत से कम दाम में ज्यादा जेट विमान कैसे खरीदे।

    फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक दोनों देशों(फ्रांस और इंडोनेशिया) के बीच समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। पहले फेज में अगले कुछ महीनों के दौरान जकार्ता को 6 राफेल सौंपे जाएंगे। बाकी के 36 विमान अगले दौर में ट्रांसफर किए जाएंगे। इस साल की आखिर में या अगले साल की शुरुआत में इंडोनेशिया को राफेल दी जा सकती है।
    भारत के बाद इंडोनेशिया दूसरा देश बन गया है जिसने इंडो- पैसिफिक रीजन में दसॉल्ट एविएशन निर्मित जेट पर भरोसा जताया हो। इस डील के बाद साउथ ईस्ट एशिया क्षेत्र में इंडोनेशिया, फ्रांस से हथियारों की खरीद करने वाला सबसे बड़ा देश बन जाएगा। फिलहाल उसका नंबर सिंगापुर के बाद आता है।

    इस लड़ाकू विमान में हवा से जमीन में मार करने वाले स्कैल्प और हैमर मिसाइल के साथ-साथ मेटेअर मिसाइलों को पहले ही शामिल किया जा चुका है। ये मिसाइलें रडार को चकमा देकर बच निकलने में सक्षम हैं। ये विमान अंतिम समय पर टारगेट को भेदने में भी माहिर हैं।

    भारत ने 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 2016 में फ्रांस के साथ सौदा किया था। अभी तक भारत को दसॉल्ट एविएशन से कुल 26 राफेल विमान मिल चुके हैं। बाकी की आपूर्ति 2022 में की जानी है।पांच राफेल विमानों का पहला जत्था 29 जुलाई 2020 को भारत पहुंचा था। इन विमानों को अंबाला में एक कार्यक्रम में आधिकारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने राफेल को लगभग €7.89 बिलियन (US $8.85 बिलियन) में खरीदा है। इस सौदे के तहत फ्रांस को भारतीय एयरोनाॅटिक्स रिसर्च में कुल कॉस्ट का 30 प्रतिशत इनवेस्ट करना था, और राफेल घटकों के स्थानीय उत्पादन में 20 प्रतिशत निवेश करना था।
    रिपोर्ट की गई कुल राशि में से €3.42 ($3.88) बिलियन प्लेटफ़ॉर्म की लागत के लिए है। एक और €1.8 ($2.04) बिलियन समर्थन और बुनियादी ढांचे की आपूर्ति के लिए है। विमान पर भारत-विशिष्ट परिवर्तनों को पूरा करने के लिए €1.7 ($1.93) बिलियन खर्च किए जाएंगे; €710 ($805.87) मिलियन अतिरिक्त हथियार पैकेज है। और €353 ($400.67) मिलियन प्रदर्शन-आधारित रसद सहायता की लागत है।

    वहीं इंडोनेशिया की डील में इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सेना वायु सेना के लिए राफेल अधिग्रहण में एक पूर्ण टर्नकी समाधान शामिल है, जिसमें एक व्यापक पैकेज शामिल है। इसमें एयरक्रू प्रशिक्षण, कई इंडोनेशियाई हवाई अड्डों के लिए रसद समर्थन और दो पूर्ण-मिशन सिमुलेटर के साथ एक प्रशिक्षण केंद्र शामिल है। .

    पिछले साल एक फ्रेंच पोर्टल ने दावा किया था कि
    फ्रेंच विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट ने भारत को 36 राफेल फाइटर जेट बेचने का सौदा हासिल करने के लिए मिडिलमैन को करीब 7.5 मिलियन यूरो (लगभग 650 मिलियन या 65 करोड़ रुपये ) का भुगतान किया था। पोर्टल के मुताबिक भारतीय एजेंसियां(सीबीआई और ईडी) ने दस्‍तावेज होने के बावजूद इसकी जांच नहीं की।
    फ्रेंच पोर्टल ‘Mediapart’ की इस रिपोर्ट के बाद भारत में विपक्ष ने एक बार फिर मोदी सरकार को जमकर विरोध किया था।

    रिपोर्ट के मुताबिक बिचौलिये सुशेन गुप्‍ता को गुप्‍त रूप से कमीशन का भुगतान किया गया। पोर्टल का कहना है कि इन दस्‍तावेजों की मौजूदगी के बावजूद भारतीय एजेंसी चुप रहीं। सीबीआई और ईडी के पास अक्‍टूबर 2018 से सबूत हैं कि दसॉल्ट ने राफेल जेट के बिक्री सौदे को हासिल करने के लिए सुशेन गुप्‍ता को घूस दी।

    2019 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राफेल खरीद में गड़बड़ी का आरोप लगाकर पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा था। राहुल ने सार्वजनिक मंचों से चौकीदार चोर है जैसे तक नारे तक लगवाए थे। कांग्रेस इस मामले में जेपीसी जांच की मांग करती रही लेकिन सरकार ने इसे अनसुना कर दिया। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। लेकिन तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की बेंच ने याचिका को खारिज कर दी।

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    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

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