Tuesday, July 5, 2022
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    जानिए पाँच साल में मोदी सरकार ने गरीब को और गरीब, अमीर को और अमीर कैसे बनाया!

    (File photo 2013 : AFP)



    इस आर्टिकल को पढ़ने से पहले हम चाहेंगे कि आप कुछ देर के लिए अपनी पसंदीदा पार्टी के बारे में सोचना बंद कर दें और खुले दिमाग से आर्टिकल को पढ़े और समझे कि हम कितना कमा रहे हैं और कितनी बचत हो रही है।

    1995 का दौर, जब देश आर्थिक उदारीकरण की ओर बढ़ रहा था। धीरे-धीरे ही सही लेकिन गरीबों की संख्या में कमी देखने को मिल रही थी। लेकिन उदारीकरण के बाद ऐसा पहली बार हुआ कि सबसे ग़रीब 20% भारतीय परिवारों की सलाना आय, जो कि 1995 के बाद से लगातार बढ़ रही थी पिछले 5 सालों में उसमें 53% की गिरावट दर्ज की गई है।
    मतलब अगर किसी आम आदमी के पास 5 साल पहले ₹100 बच रहे थे तो अब उसके पास ₹50 से भी कम बच रहे हैं।

    साल 2020-21 में गरीब लोगों की आय 2015-16 की तुलना में 53% कम हो गई। इन 5 सालों में सबसे अमीर 20% लोगों की आमदनी में 39% की वृद्धि देखने को मिली है।सर्वे के मुताबिक जहां सबसे ग़रीब 20% लोगों की आय में 53% की गिरावट दर्ज की गई वहीं लोअर मिडिल क्लास लोगों की घरेलू आय में 32% की गिरावट दर्ज की गई और मिडिल क्लास लोगों की आय में 2% की गिरावट दर्ज की गई है। तो वहीं अपर मिडिल क्लास की इनकम 7% बढ़ी है।

    सर्वे ने यह भी दावा किया है कि जिन 20% अमीरों का इनकम 1995 में कुल घरेलू आय का 50.2% हिस्सा था वो 2021 में बढ़कर 56.3% हो गया।तो वहीं सबसे गरीब 20% की हिस्सेदारी 5.9% से घटकर 3.3% हो गई।

    अभी यह सर्वे है क्या और कैसे काम करता है?

    मुंबई स्थित थिंक टैंक, PRICE यानी पीपल्स रिसर्च और इंडियाज कंज्यूमर इकोनामी ने ICE 360⁰ सर्वे 2021 किया। सर्वे अप्रैल और अक्टूबर 2021 के बीच में हुआ है।इस सर्वे को दो चरणों में पूरा किया गया है। पहले चरण में 200,000 घरों और दूसरे चरण में 42,000 घरों को कवर किया गया। यह रिपोर्ट 25 राज्यों और यूनियन टेरिटरीज के 100 जिलों के 120 शहरों और 800 गांव से मिले आंकड़े के आधार पर बनाया गया है। यह सर्वे शहरी और ग्रामीण लोगों की इनकम, खर्च, बचत, निवेश, पेशा, हेल्थ आदि के आधार पर की गई है।इस सर्वे से कोविड महामारी के आर्थिक प्रभावों का पता चलता है।

    कोरोना महामारी ने 2020-21 में दो तिमाहियों के लिए आर्थिक गतिविधियों को ठप कर दिया था। जिसके असर 2020-21 के जीडीपी में 7.3% की गिरावट के तौर पर देखने को मिली।

    यह सर्वे बताता है कि महामारी ने शहरी गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।आंकड़ों के मुताबिक 2016 में सबसे गरीब 20% में से 90% लोग गांव में रहते थे। लेकिन 2021 में यह संख्या घटकर 70% हो गया वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में सबसे गरीब 20% की हिस्सेदारी लगभग 10% बढ़ गई है।

    इस रिपोर्ट के मुताबिक यह सर्वे लोगों की आय को आधार बनाकर जनसंख्या को पांच भागों में बांटा गया। पहला,सबसे गरीब(ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक 16 करोड़) यानी 20% आबादी की आमदनी 53% घटी है।
    दूसरा लोअर मिडल क्लास,इनकी इनकम में 32% की गिरावट दर्ज की गई है।

    तीसरा मिडिल क्लास, इनकी इनकम में 9% गिरावट दर्ज की गई है। चौथा अपर मिडिल क्लास,इनकी इनकम 7% बढ़ी है। और पांचवा सबसे अमीर, यानी 20% लोगों की इनकम में 39% की बढ़ोतरी हुई है।

    सर्वे के मुताबिक 2005 से 2016 के बीच 11 सालों में सबसे अमीर 20% की घरेलू इनकम में 34% की बढ़ोतरी हुई थी। जबकि इसी दौरान सबसे गरीब 20% की घरेलू इनकम में 183% की बढ़ोतरी देखी गई थी। गरीबों की घरेलू आय 9.9% की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रही थी।
    अब आप इस आर्टिकल से समझिए कि आपकी जेब में कितना पैसा बच रहा है और आप उन बचे हुए पैसों से कैसे अपना गुजारा कर रहे हैं।

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    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

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