Tuesday, July 5, 2022
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    चन्नी ने अपने ख़िलाफ़ मु्र्दाबाद के नारे लगाने वाले प्रदर्शनकारियों से LIVE Aajtak पे की बात, मोदी को क्या करना चाहिए था उसका दिया डेमो

    मोदी का पंजाब में काफ़िला क्या रुका आसमान ज़मी पर आ गया , कमल कुम्हलाने लगे और फिर तमाम BJP नेता मुख्यमंत्री चन्नी और काँग्रेस की साज़िश बताने लगे । अंदाज़ कुछ यूँ था कि प्रधानमंत्री का काफ़िला कैसे रुका हिम्मत कैसे हुई सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री जो हैं । उधर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी मोर्चा संभाला और बोले ” मोदी की रैली में 70 हज़ार कुर्सियां लगी पर बंदे पहुँचे सिर्फ 700,इसमें मैं क्या करूँ यार”!

    यानी BJP जिसे सुरक्षा में चूक बता रही है काँग्रेस उसे मेलोड्रामा और भीड़ कम होने का बहाना, इसलिए कह रही हैं कि प्रधानमंत्री तो लौट आए।

    यह तो बात हुई आरोप प्रत्यारोप की,अब बात प्रधानमंत्री ने जो कहा,” शुक्रिया कहना अपने मुख्यमंत्री का मैं ज़िंदा लौट आया” की। अब बारी मीडिया की थी जिसे इस वाक्य को आदर्श वाक्य और साथ में यूनिवर्सल ट्रूथ बनाना था तो तमाम ख़बरिया चैनलों ने मोर्चा संभाल लिया लेकिन मैदान में पहली बैटिंग करने का मौक़ा मिला सबसे तेज़ चैनल के रिपोर्टर अशोक सिंघल को। बस फिर क्या था! लाइव, कैमरा, एक्शन करने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की गाड़ी में आजतक के संवाददाता पहुँच जाते हैं।

    इंटरव्यू चल रहा था मुख्यमंत्री का काफ़िला जा रहा था आजतक के संवाददाता हर बार गृहमंत्रालय -गृहमंत्रालय कह रहे थे तभी रास्ते में मुख्यमंत्री चन्नी को कुछ प्रदर्शनकारी दिखे जो मुख्यमंत्री का रास्ता रोक रहे थे और मुर्दाबाद के नारे भी लगा रहे थे । तभी मुख्यमंत्री बोले दिखाओ प्रदर्शनकारी मुझे रोकना चाहते हैं। कैमरा मैन सकपका गया फिर मुख्यमंत्री बोले दिखाते क्यों नहीं दिखाओ!अगर प्रदर्शनकारी मुझे रोक रहे हैं तो क्या इन्हें मार दूँ क्या कह दूँ सिक्युरिटी थ्रेट कह दूं ?”

    मुख्यमंत्री आजतक के संवाददाता से कहते हैं,
    “आप उतरिए मेरे साथ।”
    संवाददाता कहते हैं, “सर छोड़िए चले जायेंगे।”
    फिर मुख्यमंत्री बोले, “यदि मेरा इंटरव्यू करना है तो उतरो चलो दिखाओ उन्हें।”
    फिर मुख्यमंत्री उतर कर जाते हैं बिल्कुल कैज़ुअल -वे में प्रदर्शनकारियों से कहते हैं, “जब मैंने आपको कल सुबह 11 बजे मिलने को बुलाया है तो मेरा रास्ता क्यों रोका आप लोगों ने?”

    बात करते हुए उन्हें यार, बेटा, वीरे, जैसे तमाम प्यार भरे शब्दों का उपयोग भी किया। फिर मुख्यमंत्री प्रदर्शनकारियों को समझाते हुए अपनी गाड़ी की तरफ़ बढ़ रहे थे साथ में आज तक की टीम पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड कर रही थी ऐसा लग लग रहा था कि मुख्यमंत्री केमिस्ट्री के टीचर और आजतक संवाददाता छात्र और आज तक प्रयोगशाला है।

    फिर मुख्यमंत्री ने संवाददाता से कहा, “देखा! प्रदर्शनकारियों ने मेरा रास्ता रोका इसमें थ्रेट(जान का खतरा) कहाँ है ? ऐसे ही प्रधानमंत्री का रास्ता भी रोकना चाहते होंगे प्रदर्शनकारी इसमें थ्रेट कहाँ है ?”

    संवाददाता कहते हैं, “लेकिन प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री होते हैंचन्नी साहब।” तब मुख्यमंत्री कहते हैं, “अरे CM भी कुछ होता होगा CM भी कुछ छोटी सी चीज़ होता होगा उतना ही होऊँगा मैं ?” यानी मुख्यमंत्री ने आजतक को उसी के मंच पर बेनक़ाब कर दिया कि जो आप दिखा रहे हैं वह सच नहीं है। किस बात का जान को ख़तरा लोकतंत्र में शांति से प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है न कि प्रधानमंत्री के लिए जान का ख़तरा ।

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    Ashish Viraj Shukla
    crazy about News ....😊

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