Saturday, May 21, 2022
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    कैराना में फिर ‘पलायन’ की एंट्री कैसे हुई! मीडिया से इस स्क्रिप्ट को तैयार कराया गया!

    कैराना में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले घर-घर प्रचार के दौरान एक निवासी के साथ बातचीत करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। (फोटो: पीटीआई)

    जैसे-जैसे यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है राजनीति अपने रंग में दिख रही है। बीजेपी अपना पसंदीदा चुनावी दांव धीरे-धीरे खेल रही है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले ही यूपी विधानसभा चुनाव को सांप्रदायिक रंग दे दिया है। “80 बनाम 20” कहकर योगी आदित्यनाथ साफ तौर पर हिंदू- मुस्लिम के बीच ध्रुवीकरण की राजनीति करते दिख रहे हैं। इनके बाद चुनावी रण में उतरने की बारी देश के गृहमंत्री अमित शाह की थी।

    गृह मंत्री अमित शाह पिछले दिनों कैराना में डोर टू डोर कैंपेन कर रहे थे। इस दौरान गृहमंत्री ने भी अपना पसंदीदा चुनावी दांव खेला। “पलायन” बीजेपी का वह पसंदीदा दांव है जिसे वह 2017 यूपी विधानसभा चुनाव से ही खेलती आ रही है। पिछले शनिवार को देश के यशस्वी गृहमंत्री गली-गली घूमकर भाजपा पार्टी के लिए वोट मांग रहे थे। इस दौरान वह लोगों को कह रहे थे “अब डरने की जरूरत नहीं है,अगर कोई अभी भी वापस आने के लिए रह गया हो तो उसे भी बुला लो”।

    आप जानते ही होंगे कि आने वाले 10 और 14 फरवरी को पश्चिमी यूपी में पहले चरण का मतदान होना है। गृहमंत्री अमित शाह पीएम “नरेंद्र मोदी” और “भारत माता” के नाम पर वोट मांग रहे हैं।

    गृह मंत्री अमित शाह की कैराना से चुनावी यात्रा शुरू करने के काफी मायने हैं। चुनाव से ठीक 3 महीने पहले अक्टूबर में अमित शाह कहते हैं कि “कैराना पलायन याद करके उनका खून खौल उठता है।” 2 महीने पहले योगी आदित्यनाथ कैराना के व्यापारियों से मिलने जाते हैं और कहते हैं “बाबा है तो डर कैसा”।

    ठीक चुनाव से पहले योगी और अमित शाह को कैराना और पलायन याद आता है। अमित शाह को ध्रुवीकरण की पिच कैसे तैयार की जाती है बखूबी पता है। लॉ एंड ऑर्डर के मामले को हिंदू-मुस्लिम कर ध्रुवीकरण करने की कोशिश की गई। “कैराना बना कश्मीर” नैरेटिव के साथ मेनस्ट्रीम मीडिया ने पूरे चुनाव में इस ख़बर को खूब चलाया था। इसी ध्रुवीकरण का फायदा बीजेपी को 2017 चुनाव में मिला था और वह सत्ता में आई।

    लेकिन अब चुनावी समीकरण बदल गए हैं।अब पश्चिमी यूपी के जाट बीजेपी से नाराज हैं और इन्हें मनाने की जिम्मेदारी अमित शाह को दी गई है। पश्चिमी यूपी की 50 से 60 सीटों पर जाटों का दबदबा है। जाट- मुस्लिम पहले ही सपा और आरएलडी के साथ हैं। किसान आंदोलन के दौरान से ही पश्चिमी यूपी के जाट सरकार से खफा हैं, और इस वजह से गृहमंत्री अमित शाह की नींद उड़ी हुई है। एक बार फिर गृहमंत्री अमित शाह ध्रुवीकरण करके वोट लेना चाहते हैं।
    पश्चिमी यूपी में 136 सीटें आती हैं जिनमें से 2017 चुनाव में 109 सीटें बीजेपी को मिलीं। करीब 80 फ़ीसदी वोट बीजेपी को मिले थे।

    लेकिन अब समीकरण बदला हुआ है। इसलिए अमित शाह ने अपनी ध्रुवीकरण की राजनीति को कैराना से शुरू किया है। बुधवार को अमित शाह जाट नेताओं से मिले और किसानों को लेकर बड़े चिंतित भी दिखे। करीब 200 जाट बिरादरी के नेताओं से गृह मंत्री ने 2 घंटे तक मीटिंग की और सबसे साथ आने का आग्रह किया।

    क्या पश्चिमी यूपी में बीजेपी पहले के मुक़ाबले कमजोर स्थिति में ह? क्या इसलिए गृहमंत्री ने बागडोर अपने हाथ में ले ली है और उस कैराना को दोबारा भुनाने का प्रयास है जिसका सच 2016 में ही सामने आ चुका था।

    जिस कैराना में बीजेपी पलायन की बात कह रही है वह मात्र ध्रुवीकरण करने के अलावा कुछ भी नहीं है। साल 2016 (तब सपा की सरकार थी) कैराना के पूर्व सांसद स्वर्गीय हुकुम सिंह ने 346 ऐसे परिवारों की सूची सरकार को दी थी जो कथित तौर पर कैराना छोड़कर अलग राज्यों में पलायन कर के बसने चले गए थे। उनका कहना था कि अपराधी व्यापारियों को व्यापार करने नहीं देते हैं। व्यापारियों से रंगदारी वसूली जाती है। जो रंगदारी नहीं देते हैं उन्हें अपराधी जान से मार देते हैं। लूट, हत्या, बलात्कार, रंगदारी से तंग आकर 346 परिवार कथित तौर पर पलायन कर जाते हैं।

    अब इस मुद्दे को मेनस्ट्रीम मीडिया ने खूब चलाया। दिन रात कैराना की ख़बर दिखाई कि कैसे मुस्लिमों ने हिन्दुओं को भगा दिया? कैसे सपा ने कैराना को कश्मीर बना दिया?
    बिना सच की पड़ताल किए मीडिया ने सरकार के साथ मिलकर ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने लगी। सरकार के एजेंडे को मीडिया ने तब भी ध्रुवीकरण किया था और अब भी कर रही है।

    कैराना में विजय जैन और प्रवीण जैन का घर जिसका ज़िक्र पलायन लिस्ट में शामिल था। 15 साल पहले हुई थी विजय की मौत, 2015 में ही प्रवीण ने कैराना छोड़ा था। (इंडियन एक्सप्रेस फोटो: प्रवीण खन्ना)

    पलायन की बात बीजेपी खूब हल्ला मचा कर कह रही है।
    लेकिन पूर्व सांसद स्वर्गीय हुकुम सिंह और जिलाधिकारी का कुछ और ही कहना है। जिलाधिकारी ने डोर टू डोर अभियान चलाकर पूरे 346 परिवारों के बारे में जाना। 2016 में ही इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट दी थी कि 346 परिवार में से मात्र 3 परिवार अपराधियों के धमकी और डर से कैराना छोड़ कर चले गए थे। 346 परिवारों की सूची में ऐसे हिन्दू और मुस्लिम परिवार भी थे जिन्होंने अच्छी नौकरी मिलने की आस में कैराना छोड़ा था। इस सूची में कई ऐसे लोग भी शामिल थे जांच में सालों पहले मृत पाए गए।

    द ट्रिब्यून की ख़बर के मुताबिक “यह घर बिकाऊ है” की वायरल फोटो मीडिया चला रही थी वह दरअसल कंधला के व्यापारी गौरव जैन के घर का था। उस वक्त उन्होंने शामली के डीएम सुजीत कुमार से एक्शन लेने की मांग की थी।उन्होंने शिकायत किया था कि किसी ने जानबूझकर उनके घर पर ऐसे लिख दिया था।

    पूर्व सांसद स्वर्गीय हुकुम सिंह ने मीडिया के सामने कबूल भी किया मामला कानून-व्यवस्था का था जिसे संप्रदायिक दिया गया।

    कैराना बना कश्मीर“,”80 बनाम 20“,”इतनी जोर से बटन दबाना कि करंट शाहीन बाग तक पहुंचे” यह सब बीजेपी का पुराना पैंतरा है। हिंदू-मुस्लिम करके बस चुनाव जितना ही बीजेपी का मकसद है।

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    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

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