Wednesday, November 30, 2022
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    Opinion: हरदीप पुरी और मैं एक ही ईसाई स्कूल से पढ़े, इसलिए उनके नाम खुला ख़त

    जिस तरह मुसलमानों के बाद सिखों और अब ईसाइयों तक सरकार द्वारा प्रायोजित दंगाइयों के हाथ पहुँच गए हैं उससे वो दिन दूर नहीं जब हिंदू हिंदू करके वोट करने वालों के बच्चे ही इसकी चपेट में आना शुरु हो जाएँगे, बल्कि हो भी चुके हैं।

    जी हाँ ये सरकार द्वारा प्रायोजित ही हैं क्योंकि जिन राज्यों में इनकी हेकड़ी दिख रही है वहाँ उन्हें पूरा संरक्षण होने का आत्मविश्वास भी है।

    ईसाइयों के स्कूल में ज़्यादातर हिंदू पढ़ते हैं। जब उनके स्कूल में घुसकर ये दंगाई डराएँगे , धमकाएँगे, नक़ाबपोश हनुमान चालीसा गाएँगे तो सोचिए क्या होगा! हिंदू धर्म के लिए दहशत बनाई जा रही है और बनाने वाले भी और कोई नहीं ये सरकारी हिंदुत्ववादी पिट्ठू हैं।

    लेकिन मैं आज ये खुला पत्र एक ऐसे शख़्स को लिखना चाहती हूँ जिनसे मेरा एक अलग तरह का जुड़ाव है। जी नहीं नरेंद्र मोदी की बात नहीं कर रही। उन्हें तो अब कुछ भी कहना या अपील करना ही बेकार है, जिस दिन वो पीएम बनेंगे यानी पीएम की तरह बर्ताव करेंगे उस दिन शायद कुछ उम्मीद जगे।
    मैं बात कर रही हूँ केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की। आज मैं क्यों उनकी तरफ़ एक आस और जवाबदेही की नज़रों से देखती हूँ उसका कारण है।

    मैं दिल्ली स्थित फ़्रैंक एंथोनी पब्लिक स्कूल में पढ़ी हूँ। और जब हरदीप पुरी मंत्री बने थे तो हमारे स्कूल के ग्रुप में ये चर्चा ज़ोरों पर थी कि वो हमारे ही स्कूल से पढ़े हैं और ये सबके लिए एक प्राउड मोमेंट है।

    एक स्कूल , उसमें पढ़ाने वाले टीचर और उससे निकले उनके साथी और क्या महसूस कर सकते हैं , सिर्फ़ गर्व ही महसूस करके ख़ुश हो सकते हैं।

    मैं उसी दिन को याद करके आज हरदीप पुरी से पूछना चाहती हूँ। जो स्कूल आपके मंत्री बनने से प्राउड महसूस कर रहा था आज आप जवाब दें क्या उस स्कूल ने कभी आपको अपना धर्म छोड़ने या परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया?
    मैं जानती हूँ ऐसा कहीं पर भी नहीं हो रहा है सब फ़ालतू बातें हैं लेकिन मैं ख़ासतौर पर अपने स्कूल के लिए इसलिए सवाल पूछ रही हूँ कि केंद्र का एक मंत्री भी उसी से पढ़ा है और हवा में नहीं बल्कि सीधा मेरे सवालों का जवाब दे सकता है।

    हाँ तो बताइए हरदीप जी, क्या उस स्कूल से निकलने के बाद आप सिख नहीं रहे या मैं हिंदू नहीं रही?
    क्या कभी आपको अपने प्रार्थना के तौर तरीक़े बदलने को कहा गया? क्या कभी आपको फ़ोर्स किया गया कि आप क्रिसमस की छुट्टियों में जबरन अपने घर में क्रिसमस ट्री लगाकर त्यौहार मनाएँगे ही मनाएँगे।

    बताइए आपको सैंटा क्लॉस के बारे में क्या सिखाया गया?
    क्यों आप आसपास ये सब होता चुपचाप देख रहे हैं, एक मंत्री होते हुए अपने साथियों से अपील नहीं कर रहे हैं कि ये सब बंद कराया जाए। आपकी चुप्पी से मैं क्यों न मानूँ कि आप भी इन सब में शामिल हैं।

    मैं सिर्फ इस नाते आपसे जवाब चाहती हूँ कि मेरे स्कूल, उसके छात्रों और अध्यापकों को आपके जवाब के बाद कोई मलाल न रहे और हमारे लिए भी साफ़ हो कि आपके इस ओहदे तक पहुँचने के लिए आप पर गर्व महसूस करें या अफ़सोस।
    जवाब हो तो ज़रूर दीजिएगा , और उम्मीद है कि जवाब ऐसा आएगा जो स्कूल के अध्यापकों जिन्होंने आपको पढ़ाकर यहाँ तक पहुँचाया उनके साथ धोखा न हो।

    आपके जवाब का इंतज़ार
    आप ही के स्कूल से आपके कई सालों बाद पढ़कर निकली वो छात्रा जो इंतज़ार कर रही है गर्व या अफ़ेसोस करने का

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