Wednesday, November 30, 2022
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    क्यूँ भाजपा की “एक परिवार एक टिकट” की नीति रक्षामंत्री पर लागू नहीं होती है?

    Aparna Yadav Rita Bahuguna Brajesh Pathak

    “लगा राजनीतिज्ञ रहा अगले चुनाव पर घात,
    राजपुरुष सोचते किंतु,अगली पीढ़ी की बात”

    आज की राजनीति में राष्ट्रकवि दिनकर की इस कविता का मतलब पूरी तरह से बदल चुका है। आज राजनीतिज्ञ अपने चुनाव पर घात लगाने के साथ-साथ देश की बल्कि अपनी नई पीढ़ी के बारे सोचते हैं।

    रीता बहुगुणा जोशी भाजपा सांसद हैं और फिलहाल बीजेपी से कुछ ख़फ़ा चल रही हैं। वजह है उनकी अगली पीढ़ी को भाजपा से टिकट ना मिलना।

    भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने अपने बेटे मयंक जोशी के लिए लखनऊ केंट से भाजपा से टिकट की मांग की थी। उनका कहना था कि उनका बेटा सालों से भाजपा की सेवा कर रहा है, इसलिए टिकट पर उसका हक़ है। लेकिन भाजपा ने टिकट देने से साफ़ इंकार कर दिया। पार्टी का कहना है कि एक परिवार से दो सदस्यों को टिकट मिलना पार्टी की नियमों के ख़िलाफ़ है। लेकिन यहाँ भी भाजपा पार्टी दोहरी नीति अपनाते हुए दिखी। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और बेटे पंकज सिंह को टिकट देकर अपने “एक परिवार से 2 सदस्यों” को टिकट ना देने की नीति को ग़लत ठहरा देती है।

    अपनी अगली पीढ़ी को टिकट दिलाने के लिए रीता बहुगुणा जोशी सांसदी भी छोड़ने के लिए तैयार थी, बगावती तेवर भी अपनाई, लेकिन फिर भी भाजपा पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

    भाजपा ने लखनऊ केंट सीट से बृजेश पाठक को टिकट दिया है। ये योगी सरकार में मंत्री भी हैं। पिछली बार ये लखनऊ मध्य चुनाव जीते थे। अपनी नई रणनीति के तहत भाजपा ने लखनऊ की सभी सीटों पर मज़बूत उम्मीदवार उतारे हैं।

    इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है कि मयंक जोशी साइकिल की सवारी कर सकते हैं। ख़बरों की माने तो मयंक जोशी की मुलाकात अखिलेश यादव से भी हो चुकी है। हालांकि सपा ने लखनऊ कैंट सीट से राजू गांधी को टिकट दे दिया है, लेकिन अगर मयंक जोशी सपा में शामिल होते हैं तो राजू गांधी की उम्मीदवारी रद्द भी हो सकती है।

    मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव और रीता बहुगुणा जोशी दोनों लखनऊ कैंट से टिकट मांग रही थी। यहां से टिकट ना मिलने की नाराजगी से ही अपर्णा ने भाजपा का दामन थामा था। लेकिन भाजपा ने दोनों को टिकट ना देकर “खेला” कर दिया है। सियासी गलियारे की खबरों की माने तो भाजपा ने अपर्णा यादव के लिए अलग रणनीति बनाई है। अपर्णा यादव 2017 में इसी सीट पर रीता बहुगुणा जोशी से हार चुकी हैं। मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव को एमएलसी चुनाव के जरिए विधान परिषद पहुंचाया जा सकता है।

    लखनऊ कैंट ब्राह्मण बहुलता वाला क्षेत्र है। इसमें कुल 1.50 लाख ब्राह्मण रहते हैं। 40 हजार मुस्लिम, 50 हजार सिंधी/पंजाबी, 25 हजार वैश्य और 25 हजार अनुसूचित जातियां रहती है।

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    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

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