Sunday, October 2, 2022
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    एक और ‘धर्म’ संसद : इस बार प्रयागराज के मंच पर भी ‘इस्लामी जिहाद’ के विरोध में टंगा पोस्टर

    Swami Anand Swaroop (photo credit: The Quint/ Meghnad Bose)
    Swami Anand Swaroop (photo credit: The Quint/ Meghnad Bose)

    उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक ‘धर्म’ संसद का आयोजन किया जा रहा है। आप सोच रहे होंगे हमने धर्म को कोट्स में क्यों डाला है! तो इसलिए कि ये सिर्फ नाम की धर्म संसद साबित होती हैं। जो इनके आयोजक हैं उनके पिछले रिकॉर्ड खंगालेंगे तो पाएँगे इनमें धर्म छोड़कर हर अधर्मी बात की जाती है। इस बार सजाई गई इन संसदों में हो रही चर्चाओं को देखकर तो यही लगता है कि ये खास तौर पर यूपी में होने वाले चुनाव के लिए की जा रही हैं। योगी के ‘भगवाधारी’ बाबा इकट्ठा हो गए हैं योगी की कुर्सी बचाने के लिए।

     

    हरिद्वार धर्म संसद में हुए धार्मिक विवाद के बाद अब एक और धर्म संसद आयोजित होने जा रही है।यूपी में जहां सीएम खुद को योगी कहते हैं, उस प्रयागराज में जिसका नाम इलाहाबाद से बदल दिया था योगी ने, उस प्रयागराज में जहां नाम बदले जाने के बावजूद कुछ दिन पहले ही योगी की पुलिस डंडे मारकर छात्रों (जिनका धर्म सिर्फ रोज़गार माँगना था) को दौड़ाती नज़र आई थी, उस प्रयागराज में पुलिसिया गुंडागर्दी पर पर्दा डाला जाएगा ‘धर्म’ संसद के बहाने।

    प्रयागराज में महावीर मार्ग पर स्थित ब्रह्मर्षि आश्रम में धर्म संसद की कोर कमेटी की ओर से 29 जनवरी को संत सम्मेलन किया जा रहा है। धर्म संसद के संयोजक स्वामी आनंद स्वरूप के नेतृत्व में संत सम्मेलन में शामिल होने के लिए निमंत्रण पत्र दिए गए। लेकिन सब में गौर करने वाली बात यह है कि इस बार भी धर्म संसद के पोस्टर पर खुले तौर पर यह लिखा गया है कि संसद ‘इस्लामी जिहाद विरोधी’ होने वाली है। मतलब साफ़ शब्दों में ये कि यहाँ हिंदू मुस्लिम करके वोट बटोरने की कोशिश की जाएगी- किसके लिए? आप जानते ही हैं। एक और जगह जहां पर संप्रदाय और धर्म के नाम पर ‘भाषण’ की आड़ में देश के दूसरे धर्म के नागरिकों के ख़िलाफ़ ज़हर उगला जाएगा। जहां एक बार फिर हरिद्वार हेट स्पीच को दोहराया जा सकता है।और सबसे दिलचस्प बात ये कि इस संसद में योगी को वापस लाने की अपील भी की जा रही है। यानी अगर ज़हर उगला भी तो कोई कार्रवाई कभी नहीं होगी। धर्म संसद के मंच पर टंगे बैनर को देख समझा जा सकता है कि इसमें इस्लामिक जिहाद के खिलाफ अग्नि प्रज्ज्वलित की जाएगी।

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    ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि इस धर्म संसद को आयोजित कराने वाले और कोई नहीं वही ‘संत’ लोग और वही कमेटी है जिन्होंने हरिद्वार ‘धर्म’ संसद आयोजित की थी। इस ‘धर्म’ संसद में ‘स्वामी’ प्रबोधानंद, ‘स्वामी’ आनंद स्वरूप और धर्म संसद समूह के दूसरे प्रमुख सदस्य हैं।

    वहीं दूसरी ओर प्रदेश में अलग-अलग जगह पर हो रही ‘धर्म’ संसद यूपी विधानसभा चुनाव में योगी सरकार के यूपी में चौतरफा राजनीतिक प्रचार से ज्यादा कुछ नहीं लग रहा है। यह संसद जहां भी लग रही है धार्मिक बातें छोड़कर केवल यूपी चुनाव में किसका साथ दें , इस विषय में चर्चा कर रही है। एक तरफ़ किसानों ने जो महापंचायतें करके योगी-मोदी का खेल बिगाड़ा था उसी की काट में अपने पुराने हिंदू मुस्लिम फ़ॉर्म्युले का इस्तेमाल कराने की कोशिश की जा रही है ताकि न आप किसानों के साथ हुई नाइंसाफ़ी याद रखें, न छात्रों पर चले डंडे, न गली कूचों पर ख़ाली बैठे बेरोज़गार युवा। ‘धर्म’ संसद में मौजूद संत और स्वामी अपने भक्तों से अपील करते नजर आए कि आप “योगी” को ही वोट दें। आयोजन की पूर्व संध्या पर, धर्म संसद कोर कमेटी के सदस्य स्वामी आनंद स्वरूप ने प्रयागराज में घोषणा की, “यहां भक्तों के लिए हमारा संदेश ‘योगी है तो सब होगा’ है, इसलिए कृपया योगी को यूपी में सत्ता में वापस लाएं।”


    सोचने वाली बात यह है कि मंच पर लगे इस पोस्टर को देख पुलिस या सरकार के मन में कोई सवाल नहीं उठ रहा है और ना ही इस पर कोई कार्रवाई की जा रही है। या शायद पुलिस और प्रशासन हरिद्वार हेट स्पीच के दोबारा दोहराए जाने का इंतजार कर रही है।उसके बाद कार्रवाई होगी या नहीं इसकी सच्चाई से आप भी वाक़िफ़ हैं और आयोजक भी। सबसे सेफ़ राज्य है उनके लिए ज़हर उगलने के लिए।‌ सवाल ये उठता है कि कब तक देश में ऐसी ‘धर्म’ संसदों में सांप्रदायिक सोच को बढ़ावा दिया जाएगा। और क्या धर्म संसद ने अपना सही उद्देश्य खो दिया है जिस कारण ही पिछली बार रामदास महंत मंच से ही गांधी को गाली दिए जाने का विरोध करके, इसे अधर्म संसद कहकर ग़ुस्से में चले गए थे।

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    Tannu Rai
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