Saturday, May 21, 2022
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    एबीपी न्यूज़ में जिसने भी ये ग्राफ़ बनाया है उसे वॉट्सऐप युनिवर्सिटी का टॉपर घोषित किया जाए

    देखिए, ये वही टीवी चैनल हैं जो आपको रोज़ सच दिखाने का वादा करते हैं , खुद को निष्पक्ष बोलने की होड़ में उन्हीं चेहरों से प्रोमो बनाकर आपको लुभाने की कोशिश करते हैं जिन्हें फ़ील्ड रिपोर्टिंग से गोदी मीडिया कह कहकर आप ही लोग खदेड़ देते हैं। जब चैनल के मालिक को इतनी ही समझ नहीं है कि उसका जनता के बीच जाने वाला रिपोर्टर उसकी क्रेडिब्लिटी बढ़ाएगा ! या वो जो स्टूडियो से बाहर निकलने की हिम्मत तक नहीं कर पाते? तो ऐसे लोगों से ये उम्मीद भी करना बेमानी है कि उन्हें इस ग्राफ़ में कोई गलती भी दिखी होगी!

    उस हिसाब से तो सही ही बनाया है! इनके IQ लेवल के हिसाब से बेरोज़गारी से ख़ुदकुशी 2851 से बढ़कर नहीं घटकर ही 3548 हुई होगी
    मोदी है तो मुम्किन है का नारा भी बुलंद हो गए इस बहाने। इन्हें तो वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी का टॉपर घोषित किया जाना चाहिए।

    कोई भी गंभीर चैनल होता या आज की पत्रकारिता ही गंभीर होती तो चैनल क्या करता!

    1. अगर ये जानबूझकर नहीं बनाया गया तो बनाने वाले की नौकरी पर आ जाती

    2. हो सकता है एंकर (इस केस में रुबिका लियाक़त) को शो के दौरान नहीं दिखा टीवी पर उनके ही ‘मास्टरस्ट्रोक’ में क्या चलाया गया! तो सोशल मीडिया से बाद में तो उन्हें अवगत कराया गया! मुझे तो नहीं दिखता उन्होंने इसके लिए अपने ट्विटर पर माफ़ी तक माँगी हो! शो आपका, ज़िम्मेदारी भी आपकी। कहाँ है माफ़ीनामा! कमाल है सावरकर से अब तक कुछ सीखा नहीं! इन मोहतरमा के पास किसी एक की शान में हर तरह के ट्वीट करने का समय है पर माफ़ी माँगने का जिगरा नहीं, ऐसा है अहंकार।

    3. चैनल को भी रुबिका के अगले शो में ही माफ़ी मँगवानी चाहिए थी, चैनल पर माफ़ी की पट्टी चलानी चाहिए थी, सोशल मीडिया पर भी ज़िम्मेदारी लेकर माफ़ी डालनी चाहिए थी।

    लेकिन ठहरिए! हम कुछ ज़्यादा ही उम्मीदें नहीं कर रहे हैं इनसे! जो आए दिन नफ़रत परोसने के बावजूद आत्मग्लानि में नहीं जी रहे! जो तबलीगी जमात को बदनाम करके देश के सभी मुसलमानों को सुपर स्प्रेडर बताकर शर्मिंदा नहीं हो रहे! जो दो हज़ार के नोट को फ़्रीज़र में रखकर चिप उगलना वाला बताकर शर्म से पानी पानी नहीं हो रहे और जिनके प्रोमो वाले चेहरे आए दिन ट्विटर पर और स्टूडियो में सिर्फ और सिर्फ मोदी का एजेंडा चलाने का काम कर रहे, इनकी फैलाई नफ़रत से सड़क पर चलता कोई आदमी लिंच तक होने की कगार पर आ गया है, देखे हैं न वो वीडियो जहां सब्ज़ी वाले, ठेले वाले, किसान, मज़दूर सबको धर्म देखकर, जाति देखकर, कहाँ से आया है वो देखकर प्रताड़ित किया जाता है!

    जबरन जय श्री राम बुलाया जाता है और दुस्साहस इतना कि वीडियो बनाया जाता है , ये सब इन्हीं की तो देन है। उनसे इतने बड़े पापों के लिए माफ़ी न मिली तो इस छोटी सी मासूम सी गलती के लिए क्या ख़ाक माफ़ी माँगेंगे!

    पर अब समझ आया ये लोग ऐसे ग्राफ़ बनाना कहाँ से सीख रहे हैं!

    मदारी जैसा कहेगा बंदर वैसा ही तो नाच दिखाएगा
    वैसे भी इनका मोटो है
    आपको रखे आगे
    इसमें आप कौन हैं समझ जाइए

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    Shruti Bhardwaj
    Journalist, who loves to write only Political news. Love Satire. Keen Observer and a good orator.

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